How many palyopam pap get washed away with dhyan of shetrunjay
कैनकंठ: शत्रुञ्जय शरण में ध्यान करने से अविद्या-भर्त पाप नष्ट होते हैं, पर कितने पल्योपन के बराबर पाप धुल जाते हैं, इसका ठोस निश्चित अं संख्या जैन शास्त्रों में नहीं दी जाती। पल्योपन काल का अर्थ भव-चक्र के भीतर असंख्य वर्षों का मान है, और एक पल्योपन् काल = एक मानक समय नहीं बल्कि अनंत-समय के जैसे मापा जाने वाला काल है। कुछ संदर्भों में कहा गया है कि जीवन-जगत के कर्म कई पलों में फैले रहते हैं, और भक्ति-ध्यान से पापों का नाश होता है, पर व्यक्तिगत पाप-गणना (जिन्हें आप “पल्योपन पाप” कह रहे हैं) का निश्चित आंकड़ा शास्त्रों में नहीं दिया गया।
कुल मिलाकर यही है:
- पल्योपन काल एक बहुत लंबा, निश्चित नहीं माना जाने वाला समय मापक है.
- शत्रुंजय पर ध्यान से असंख्य पाप धुल जाते हैं, पर ठीक कितने पल्योपन पाप धुलते हैं, यह स्पष्ट नहीं कहा गया है.
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में व्याख्या का फर्क छोटे-मोटे पाठ-भेदों के अलावा मूल भाव में अधिक अंतर नहीं है: सभी कहते हैं कि तीर्थ-ध्यान से पाप धुलते हैं, Moksha की दिशा मजबूत होती है।
अगर चाहें, मैं इसे बारे में Digambar व Shwetambar के संदर्भों के अनुसार अलग-अलग शब्द-रेखाओं से सरल बनाकर बता दूँ।