Jaymal ji ki ek rachna
पढ़ाई के लिहाज से एक प्रसिद्ध Jain स्तोत्र जो अक्सर जयमल जी (या किसी भी ईश्वर-पूजा के संदर्भ में) से जुड़े उल्लेखों के बजाय व्यापक रूप में पूজা के लिए पढ़ा जाता है, वह नमोकर मंतर (Navkar Mantra) है।
नमोकर मंतर (अनुसंधान के लिए मूल पाठ)
- नमो अरिहंताणं नमः
- नमो सिध्दाणं नमः
- नमो मनुष्याणं नमः
- नमो बिशैनं नमः
- नमो आयरञाणं नमः
सार भाव (arth)
- प्रभु, अरिहंत (जो नेत्र-आध्यात्मिक और तांत्रिक सात्विक मार्ग के आरंभकर्ता) को नमस्कार।
- सिद्ध (आसुरी नहीं रहते, पूर्ण आत्म-शुद्धि प्राप्त अधिकारी) को नमस्कार।
- मनुष्यों को नमस्कार।
- संप्रदाय के क्रम में अन्य पवित्र जैन विभूति–श्रेणियों को नमस्कार।
- आयर्यों (चौथे पाद) आदि को नमस्कार।
Digambar बनाम Shwetambar में भिन्नता
- Navkar Mantra का मूल उद्देश्य समान है— त्रिकुटी के प्रति पुण्य-प्रतिष्ठा और आत्म-स purity. दोनों परंपराओं में यह मंत्र अत्यंत पवित्र माना जाता है, हालाँकि उच्चारण के छोटे रूप और चयनित पाठों में सन्निकटन/उच्चारण-भेद हो सकता है।
- परंपरागत उपदेश के अनुसार, यह स्तोत्र सर्वाधिक शुद्ध आत्मा की आराधना के लिए है और अधिकतर सभी जैन संप्रदायों में एक समान माना जाता है।
यदि आप चाहें, मैं Navkar Mantra के व्याख्या को सरल हिंदी में विस्तार से समझा सकता हूँ, या किसी और खास Jain रचना (जैसे एक विशिष्ट तीर्थंकर-स्तोत्र, चौकी, या आरती) के मूल पाठ और अर्थ दे सकता हूँ।