He shravak / shravika tabiyat naa hisaabe tap naa kari sakta hoy toh teh pratikraman buanaavi sake khara ..??
हाँ, शरवक/शरविका अगर तबीयत वजह से Tap नहीं कर पाएँ, तो भी Pratikraman कर सकेंगे. Pratikraman Jain धर्म में पापकangedha (अपशमन) का एक माध्यम है और यह आत्म-सुधार, क्षमा माँगना और अगले समय में वही गलतियाँ न दोहराने का संकल्प बताता है. Tap-avirata नहीं निभा पाने की स्थिति में Pratikraman एक उचित विकल्प है.
मुख्य बातें:
- Pratikraman स्वास्थ्य/स्थिति के अनुसार किया जाता है; अगर शरीर दिक्कत है, तो भी इसे किया जा सकता है ताकि मन, वचन, कर्म तीनों से पवित्रता बनी रहे.
- यह अभिमंथन है कि हमने कौन-कौन गलतियाँ कीं, किनसे नुकसान पहुँचा, और उन्हें अगली बार कैसे रोकेँगे.
- प्रतिक्रमण में सभी जीवों से क्षमा माँगना, चूक-चूक का स्मरण और भविष्य में सुधार का संकल्प शामिल रहता है.
- Digambar और Shwetambar समुदायों में Pratikraman के शब्दों/क्रमों में हल्की-सी भिन्नता हो सकती है; पर मूल उद्देश्य शुद्धि, क्षमा और संयम का अभ्यास ही रहता है.
अगर चाहें, मैं आपको एक सरल-Pratikraman का कदम-दर-कदम outline दे सकता हूँ, या Digambar/Shwetambar के बीच के अंतर को संक्षेप में बता सकता हूँ.