Jain dharam mai shaswat padd konsa hai, jese shaswat tirth hai vese padh konsa hai
সংক্ষেপে: Jain dharm में “Shaswat padd/paddhati” से आशय है शाश्वत, अविनाशी धर्म–जो तीर्थंकरों ने संसार के लिए दर्शाया है। इसे ही हम Sanatan/आसननातित (स्थिर) धर्म के रूप में मानते हैं। इस शाश्वत पथ का वास्तविक लक्ष्य मोक्ष है।
मुख्य पथ (जैन धर्म का सनातन मार्ग):
- त्रुटन (Ratnatraya): सम्यक दर्शन (Samyak Darshan), सम्यक ज्ञान (Samyak Gyan), सम्यक चारित्र (Samyak Charitra) – यही जैन मार्ग का आधार है।
- आचार-व्रत (आचार-नीतियाँ):
- मोक्ष का मार्ग: अहिंसा, अनीहिंग्सा, सत्य, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह आदि नैतिक 규हमार्गों के पालन से जन्मों के चक्र से मुक्ति।
Digambar बनाम Shwetambar के बीच सामान्य अंतर (संक्षेप में):
- दोनों ही शाश्वत धर्म के आधार: त्रयरत्न (Darshan–Gyan–Charitra) और पंच/अनुव्रत के सिद्धांत मानते हैं।
- टेक्स्ट-निर्भर मतभेद: कुछ प्रमुख ग्रंथों, पालन-विधान और साधना-व्यवहार में भिन्नता हो सकती है (जैसे आचार-श्रुतियों/तोह के व्यक्तिगत व्यवहार से जुड़ी बातें). पर मूल मार्ग और मोक्ष की गरिमा दोनों परस्पर समान समझते हैं।
- महिलाओं के मोक्ष के विषय में व्यवहारिक-दृष्टि में मतभेद भी देखने को मिलते हैं, लेकिन हर परम्परा में मोक्ष की संभवना पर विश्वास है।
अगर आप चाहें, मैं इस विषय से जुड़ा मूल मन्त्र/सूत्र (सम्यक दर्शन-ग्यान-चारित्र) या पंच-व्रतों के लिए सरल, व्यावहारिक मार्ग भी साझा कर सकता हूँ।