27 bhav of Mahavir swami
Mahavir Swami ke 27 Bhav (पूर्व जन्म) Jain शास्त्रों में महावीर स्वामी के 27 पूर्व जन्मों का वर्णन मिलता है. इन 27 भवों से उसकी साधना, पुण्य, तप और अंत में kevalgyan तक की यात्रा बताई जाती है. कई ग्रंथों में भव्य-वर्णन थोड़ा भिन्न मिलता है, पर मुख्य विचार यह है कि 27 भवों के क्रम से महावीर ने अलग-अलग योनियों में जन्म लेकर कर्मों का क्षय किया और अंततः 28वें भव में महावीर बने.
नीचे 27 भवों की साधारण सूची और उनसे जुड़ा अर्थ है ( Arth ):
1) नायसर - राजा के रूप में जन्म; संयम, दया और धर्म-सेवा की शुरुआत 2) दिवंकर - देव-लोक में जन्म; आचरण, विधि-पालन के संकेत 3) मरिची - भारत के राजकुमार के पुत्र; तप-संयम की पहली झलक 4) प्रणन्द - तपस्वियों के प्रति श्रद्धा, साधना-मार्ग का आरम्भ 5) किनरी - देव-लोक में जन्म; शुभ कर्मों का संचय 6) द्रुमि - देव-लोक में जन्म; ज्ञान-वृद्धि के संकेत 7) नन्द - राजा के रूप में जन्म; सामंजस्य और कर्तव्यशीलता 8) विजय - देव-लोक में जन्म; धर्म-दर्शन का प्रभाव 9) राजा - राज-जीवन में जन्म; वैराग्य के बीजपोषण 10) देव - देव-लोक में जन्म; फल-साधना का क्रम जारी 11) राजा - राज-जीवन में जन्म; परोपकार का अभ्यास 12) देव - देव-लोक में जन्म; सत्कर्मों का प्रभाव 13) राजा - राज-जीवन; धर्म-कथाओं का पालन 14) देव - देव-लोक; तप-अनुभव की वृद्धि 15) राजा - राज-जीवन; अहिंसा-आचार का अभ्यास 16) देव - देव-लोक; सम्यक् ज्ञान के लिए प्रेरणा 17) राजा - राज-जीवन; नैतिक जिम्मेदारियाँ 18) देव - देव-लोक; तप-सहिष्णुता 19) राजा - राज-जीवन; कर्म-बंधन काटने के प्रयत्न 20) देव - देव-लोक; आचार-विचार का ऊर्ध्वगमन 21) राज़ा - राज-जीवन; शांति और करुणा 22) देव - देव-लोक; दया-धर्म का विकास 23) राज़ा - राज-जीवन; लोक-कल्याण में प्रयत्न 24) देव - देव-लोक; ज्ञान-ग्रहण का क्रम 25) सद्भव - मानव-योनि; मानव जीवन के पुण्य-कार्य 26) देव - देव-लोक; आराधना और सेवा 27) महावीरस्वामी - अंतिम जन्म; विरक्ति, साधना-संयम और kevalgyan की स्थिती; अंततः मोक्ष
टिप्पणी:
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में नामों और क्रम में छोटे-छोटे भिन्नतायें मिलती हैं, पर मूल सिद्धांत वही है: 27 पूर्व जन्मों के माध्यम से कर्म-क्षण और मोक्ष-मार्ग का वर्णन.
- इन भव्य विवरण का मूल उद्देश्य जैन सिद्धान्तों के अनुसार अहिंसा, साधना, धारणा, संयम और परिणामस्वरूप निर्वाण की प्रेरणा देना है.
अगर आप चाहें, मैं इन भवों के बारे में मौजूदा पाठ्य स्रोतों से सटीक श्लोक/उद्धरण भी दे सकता हूँ (और बतला सकता हूँ कि कौन से ग्रंथों में कौन से भव अलग तरीके से बताए गये हैं).