Agle bhav ka bandh kab hota he
संक्षेप में: अगला जन्म का बंधन खत्म होने का कोई निर्धारित तारीख नहीं है। यह केवल उसी समय समाप्त होता है जब आत्मा सभी कμα-परिमार्जन ( karma ) को पूरी तरह भस्म कर लेती है और मोक्ष को प्राप्त कर लेती है।
क्यों और कैसे:
- Jain धर्म के अनुसार जीवन चक्र सात्विक (पवित्र) कर्मों के कारण चलता है। जब člov karm, passionate attachments, और अशुद्धि समाप्त नहीं होते, तब पुनर्जन्मChalti रहती है।
- मोक्ष (निर्वाण) तब होता है जब ऋषि-क्रिया, तप, संकल्प और नैतिक जीवन के जरिए सभी karm निष्कासित हो जाते हैं। तब फिर कोई नया जन्म नहीं होता।
- अगर कोई आत्मा अभी भी karm को नहीं भस्म करती, तब वह चक्र चलता रहता है और अगला जन्म होता है।
- कुछ मत-फैसों में जैन परंपराओं के अनुसार महिलाओं के मोक्ष की स्थिति में भिन्नता हो सकती है, पर मूल सिद्धांत यही है: मोक्ष ही बंधन का अंतिम अंत है।
संकेतित सरल निष्कर्ष:
- अगला जन्म तब तक बंधा रहता है जब तक मोक्ष नहीं मिल जाता।
- मोक्ष मिलने पर कोई नया जन्म नहीं होता; आत्मा ब्रह्मांड-स्वरूप शुद्ध निर्वाण को प्राप्त कर लेती है।
यदि आप चाहें, मैं इस विषय पर Digambar और Shwetambar परंपराओं के कुछ छोटे-छोटे मतभेद भी सरल शब्दों में समझा दूँ।