Ek tap,ek dharm ka phool
"Ek tap, ek dharm ka phool" का अर्थ है—एक तपस्या, एक धर्म का फूल। जैन धर्म में 'तप' (तपस्या) को आत्मशुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का प्रमुख साधन माना गया है। जैसे एक फूल अपने पौधे की सुंदरता और महक का प्रतीक होता है, वैसे ही 'तप' धर्म के मार्ग पर चलने वाले साधक के जीवन में शुद्धता, संयम और आध्यात्मिक प्रगति का प्रतीक है।
जैन आचार्यों ने कहा है कि धर्म का सार तपस्या, संयम, अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, और अपरिग्रह में है। जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से तप करता है—जैसे उपवास, कायोत्सर्ग, स्वाध्याय आदि—तो उसका जीवन धर्म के पुष्प की तरह सुगंधित और सुंदर हो जाता है।
इसलिए, 'एक तप, एक धर्म का फूल' का भावार्थ यही है कि एक सच्ची तपस्या धर्म के मार्ग पर चलने का श्रेष्ठ और सुंदर परिणाम देती है।