Sthanakwasi choviyaar upvas pachkan
माफ़ कीजिए, आपने जो शब्द लिखा है उसे मैं सही से समझ नहीं पाया। “Sthanakwasi choviyaar upvas pachkan” से लगता है कि आप Sthanakwasi Jain परंपरा में उपवास (upvas) के बारे में पूछ रहे हैं, लेकिन “चोवियार/चोवियाऱ” जैसा खास शब्द Jain शब्दावली में स्पष्ट नहीं दिखता। अगर आप उसे थोड़ा साफ़ करके दोहर दें (जैसे सही शब्द या वाक्य), तो मैं उसी के अनुरोध अनुसार शुद्ध Jain स्रोतों के अनुसार उत्तर दूँगा।
फिलहाल, Sthanakwasi जैन सम्प्रदाय के बारे में कुछ संक्षिप्त स्पष्टता:
- Sthanakwasi जैन धर्म में मूर्तिपूजा और मुरत-पूजा से कुछ हद तक दूरी रखते हैं और साधना, ध्यान और आचार-व्रत पर ज़ोर देते हैं।
- उपवास (upvas) सामान्य तौर पर जैन आचार-व्यवहार का अहम हिस्सा है, जिसे पवित्रता, तपस्या और आत्म-नियंत्रण के अभ्यास के रूप में किया जाता है। उपवास के प्रकार और समय Digambar/Shwetambar की परंपराओं में कुछ भिन्नताएँ दिखाती हैं, परन्तु दोनों में चिह्नित दिनों, नियमों, और ब्रह्मचर्य/व्रत की भावना समान रहती है।
- Paryushan, दिवा-उपवास, मासिक/सप्ताहिक उपवास आदि कई प्रकार के उपवास प्रचलित हैं; Sthanakwasi समाज में भी यह साधना बड़े कठोरता और अनुशासन के साथ की जाती है।
अगर आप चाहें, आप ठीक शब्द/वाक्य के साथ पूछ दें—मैं original Jain sutra/stotra के अनुसार निम्न बातें दे दूँगा:
- संबंधित शास्त्र के मूल पाठ (यदि उपलब्ध हो),
- उसका सही arth (अर्थ) Digambar और Shwetambar की परम्पराओं के अनुसार स्पष्ट करते हुए,
- उपवास/पञ्चक के नियमों के बारे में Jain दृष्टिकोण से सरल और सीधे शब्दों में,
- और किसी भी भिन्नता/मतभेद को भी स्पष्ट कर दूँगा।
आप चाहें तो शब्दों को सही कर दें या एक छोटा सा संदर्भ दे दें कि आप किस प्रकार के उपवास-पंच (upvas pachkan) के बारे में पूछ रहे हैं—जैसे मासिक उपवास, पार्षुण जोत (परीयोजना) समय के उपवास, या कोई विशेष निश्चय/व्रत।