4 prhari paushad
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जो शब्द आप लिख रहे हैं, “4 prhari paushad”, उसका स्पष्ट अर्थ Jain धम्म में अलग-अलग interprations हो सकता है. दो संभव अर्थ हो सकते हैं:
- चार प्रहर: दिन-रात्रि को चार भागों (प्रहर) में बाँटा जाता है—पूर्वाह्न, दोपहर, सन्ध्या, रात्रि। कई पंचांगों में भोजन/औषधि आदि के समय इन prahar के अनुसार निर्धारित नियम बने होते हैं।
- पौषाद/पौषध: सामान्य रूप से औषधि या द्रव्य-औषधि का संकेत हो सकता है; Jain आचार-व्यवहार में औषधि सेवन के नियम विशेष होते हैं, खासकर संगम/संघ-जीवन में।
कृपया स्पष्ट स्पेलिंग या संदर्भ दें ताकि सही arth दूँ। अगर आपका मतलब किसी विशिष्ट ग्रंथ, पाठ या प्रथा से है, उसका संदर्भ बताने से मैं सटीक विवरण दे दूँगा।