"क्षमा का भाव आत्मा को हल्का कर देता है, क्रोध और राग द्वेष का बोझ उतार देता है। यही पर्युषण पर्व हैं आप सभी को पर्युषण पर्व हार्दिक शुभकामनाएं
बहुत सुंदर विचार! क्षमा का भाव सचमुच आत्मा को हल्का कर देता है और क्रोध-राग-द्वेष के बोझ को हटा देता है। पर्युषण पर्व के दौरान यह सबसे महत्वपूर्ण अभ्यासों में एक है—हम सब मिलकर प्रीति, क्षमा और पाप-त्याग की ओर बढ़ते हैं।
जैन धर्म में क्षमा को अत्यंत ऊँचा स्थान दिया गया है। इसे केवल एक व्यवहार नहीं बल्कि निष्काम आचार-व्यवहार का अंग माना जाता है; पर्युषण में खास तौर पर प्राकृत, प्राक्टिक्रमण (प्रष्ठ) और सम्वत्सरी के समय क्षमा-उच्चारण किया जाता है ताकि मन, वचन और कर्म पवित्र रहें। दोनों परंपराओं (श्वेतांबर और Digambar) में क्षमापना और क्षमा के आदर्श को समान महत्त्व दिया जाता है, और परमावसान में हम समस्त जीवों से क्षमा मांगते हैं और स्वयं से भी क्षमा याचना करते हैं।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ,Ptrs: पर्युषण मंगलमय रहे—आप सभी को बहुत-बहुत शुभ पर्युषण!