Charo prakar k aahar jal ka tyag
जैन धर्म में आहार और जल पर कठोर संयम रखा जाता है—हिंसा-निष्ठा और जीवन के प्रति संवेदना मुख्य बिन्दु हैं। “चार प्रकार के आहार” और जल त्याग से जुड़ी बातों के संदर्भ Digambar और Shwetambar Traditions के बीच कभी-कभी भिन्न हो سکتی हैं, क्योंकि दोनों संप्रदायों के आचार-निर्देशों में छोटे-छोटे भेद मिलते हैं।
यदि आपका उद्देश्य किसी विशेष सूत्र, स्तोत्र या अनुशासन (जैसे क्षात्र-प्रवृत्ति, उपवास के प्रकार, याSallekhana से जुड़े नियम) का है, तो कृपया बताएं ताकि मैं उसी के अनुसार सही अर्थ (arth), पार्श्व-मत और संबंधित स्रोतों के साथ स्पष्ट कर दूँ।
ध्यान दें: JainDharma के अनुरूप उत्तर देने के लिए मैं Digambar और Shwetambar दोनों परम्पराओं के विवेचन को अलग-अलग रखकर स्पष्टता से समझाऊँगा, और यदि संभव हो तो सटीक आचार-विधि बताऊँगा।