“Ashika mantra” के बारे में Jain ग्रंथों में साफ-साफ एक मान्य नाम नहीं दिखता। अगर आप किसी खास मंत्र के बारे में पूछ रहे हैं, तो कृपया सही नाम बताएं। फिलहाल Jain धम्म के भीतर जो सबसे सामान्य और महत्त्वपूर्ण मंत्र है, उसका पठन कैसे किया जाए, उसके बारे में सरल तरीका नीचे है:
- शांत और साफ स्थान चुनें, कम रोशनी में बैठ जाएँ (सुखासन/पीठ straight रखें)।
- हो सके तो कुछ समय के लिए प्राणायाम करके मन को शांत करें।
- उच्चारण (उच्चारण की महत्ता)
- “नमो अरिहंताणं” (Namó Arihantanam) से शुरू करें।
- इसके बाद पाँच परम पावन स्तुतियाँ: “नमो Siddhāṇam”, “नमो आयरियंम”, “नमो सविशायाणं”, “नमो मनుగणं” आदि।
- हर शब्द स्पष्ट और धीमी गति से उच्चारण करें; दिल में सही भाव और श्रद्धा रखें।
- शुरू में दिन में एक बार या दो-तीन बार 5–11 रoterapia (राउंड) करें। धीरे-धीरे जरूरत के अनुसार बढ़ा सकते हैं।
- दीपक/धूप जलाकर, या धार्मिक आचरण के अनुरूप, हर जप के बाद श्वास-उच्छ्वास पर ध्यान दें।
- Namokar मंत्र का उद्देश्य अरिहंत, सिद्ध, आयरिय, सुद्ध, और समान्तर ज्ञान वाले पवित्र व्यक्तित्वों का सम्मान और_ATTACHMENT है ताकि हमारे भीतर अहंकार घटे और निष्काम सेवा-भाव बढ़े।
- हर पंक्ति का अर्थ मन में स्थिर करें और खुद को शुद्ध करने के लिए प्रेरित हों।
- दैनिक नियमों के साथ पढ़ना उचित है—खाली शब्द नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और विनय के साथ।
- यदि संभव हो, गुरु–शिष्य से मार्गदर्शन लें ताकि सही उच्चारण और भाव बन सके।
- Digambar/Shwetambar के बीच भिन्नताएँ
- Namokar मंत्र के मूल भाव में दोनों संप्रदायों के बीच बड़ा अंतर नहीं है, पर उच्चारण-परंपरा, पाठ के क्रम और कुछ शब्दांत में विविधताएँ हो सकती हैं। अपने निवासी संप्रदाय के अनुसार पंक्ति-क्रम या संकल्प (निष्ठा) पर गुरु से पुष्टि कर लें।
यदि आप स्पष्ट नाम या खास मंत्र बताएंगे, तो मैं उसके अनुसार सही पाठ (शाब्दिक मूल पाठ/स्तोत्र) और उसका सही अर्थ (arth) Digambar और Shwetambar दोनों संदर्भ में स्पष्ट कर दूँगा।