Jain Dharm mein कौन-कौन Si jaati aati Hain
संक्षेप में: Jain धर्म में कोई आधिकारिक “जाति” (जāti)-pratha नहीं है। धर्म के अनुसार व्यक्ति का आचरण, शमं, तप, और भाइचारे पर प्रमुखता है, न कि जन्म से मिली जाति पर।
मुख्य बातें:
- धर्मिक तौर पर दो बड़े संप्रदाय (सभ्यताएँ) हैं: Digambar और Shwetambar (Svetambar). इन दोनों के अंदर छोटे-छोटे उप-समुदाय या परंपराएँ भी पाई जाती हैं, पर ये जाति-आधारित व्यवस्था नहीं मानी जातीं.
- जाति-व्यवस्था Jain समाज में सामाजिक/आर्थिक पृष्ठभूमि के रूप में हो सकती है, लेकिन इसे धर्म की कसौटी के रूप में नहीं देखा जाता। Jain शिक्षा-धर्म में समानता और अहिंसा प्रमुख मूल्य हैं।
- Digambar बनाम Shwetambar के भीतर कौन-सी उप-समुदाय हैं, यह इतिहासिक-परंपरागत विभाजन है; इसे जाति-चिह्न नहीं माना जाता और प्रत्येक व्यक्ति के धार्मिक नियम और आचार-व्यवहार वही मानक माने जाते हैं।
अगर आप चाहें, मैं Digambar और Shwetambar के बीच के मुख्य भेद ( Arth, prakriya, पूजापाठ आदि) सरल शब्दों में बता सकता हूँ।