द्रव्य किसे कहते है कितने है और उनके नाम
संक्षेप में: द्रव्य (dravya) = जैव-जड़ चेतन-स्तर के बाहर स्थिर वास्तविक पदार्थ जो स्थाई गुण रखते हैं। जैन दर्शन के अनुसार कुल छह द्रव्य होते हैं।
कौन-कौन से द्रव्य हैं (छह द्रव्य):
- जiva (जीव) — सचेत आत्मा/जीव
- pudgala (पुद्गल) — पदार्थ/भौतिक पदार्थ
- dharma (धर्म) — गति का सिद्धांत (चालक शक्ति)
- adharma (अधर्म) — विश्राम/अगति-रुकावट का सिद्धांत
- akasha (आकाश) — स्थान/स्थल
- kala (काल) — समय
थोड़ा स्पष्ट किया जाए:
- जिव और पुद्गल सीधे-साधे पदार्थ हैं जिन्हें जैन विज्ञान वास्तविक और स्थायी मानता है।
- धर्म, अधर्म, आकाश, काल ये चारों भी वास्तविक द्रव्य होते हैं और प्रत्येक के अपने-अपने गुण और क्रियात्मक प्रभाव होते हैं।
- कर्मा (कैसा) एक तत्ती है जो ajiva में पड़ा रहता है; इसे द्रव्य के रूप में नहीं गिना जाता। (कुछ परंपराओं में इसे अलग tattva के रूप में माना जाता है, पर द्रव्य-सूचि में सामान्यतः छह द्रव्य ही गिने जाते हैं।)
ध्यान दें:
- Digambar और Shwetambar परंपराओं में द्रव्य की मूल परिभाषा और नामांके भिन्न-भिन्न व्याख्या मिलती है, लेकिन अधिकांश जगह छह द्रव्य ही मानते हैं। यदि आप चाहें, मैं इन दो प्रमुख परंपराओं के बीच मतभेद सरल शब्दों में भी समझा सकता/सकती हूँ।