जीव तत्व क्या है
जीव तत्व क्या है
- जीव (Jiva) जीव चेतना वाला आत्मा है; वह सत्वंर, जानने-समझने की क्षमता वाले तत्व के रूप में माना जाता है। यह चैतन्य (चेतना) है और शरीरधारी रहते हुए भी अपना अलग अस्तित्व रखता है। ( en.wikipedia.org)
- Jain दर्शन में जगत दो प्रकृतियों में बँटा माना गया है: जीव (jiva) और अजिव (ajiva)। जीव शरीर धारण करने वाले जीवों का संसार है, जबकि अजिव बिना चेतना के पदार्थ हैं। ( en.wikipedia.org)
- जीव के साथ karma का संबंध क्या है: जीव कर्मा के कारण जन्म-स्वरूप बदलता है, और सही मार्ग से कर्मों का संचय रोककर ही मोक्ष मिलता है। इसीलिए जीव का स्वावलंबी विकास और मोक्ष प्राप्ति एक महत्वपूर्ण लक्ष्य मानी जाती है। ( en.wikipedia.org)
- जीवन-मोह के अधिग्रहण (nav tattva) में जीव का स्थान:first tattva है जीव, फिर अजिव; इसके अलावा नौ tattva (Jiva, Ajiva, Punya, Papa, Asrava, Bandha, Samvara, Nirjara, Moksha) की समझ मोक्ष के मार्ग की कुंजी मानी जाती है (शास्त्रों में Śvetāmbara और Digambara मतों के अनुसार कुछ भिन्नता हो सकती है)। ( hinduwebsite.com, jainworld.com)
- प्रमुख बिंदु: जीव चेतनाशील आत्मा है; कर्म से bondage होता है; समvar (आ influx रोकना) और nirjara (कर्म का निष्कासन) द्वारा मोक्ष (पूर्ण मोक्ष) पाया जाता है। Digambar और Śvetāmbara के बीच 9 tattva बनाम 7 tattva की अलग मान्यताएँ पाई जाती हैं; सामान्य तौर पर जीव-और-ajniva को समान माना जाता है। ( en.wikipedia.org, hinduwebsite.com)
संक्षेप में:
- जीव वह आत्मा है जो चेतना से परिपूर्ण है।
- संसार के चक्र में जन्म-प्रत्यय जीव के कारण होते हैं, कर्म ऊर्ध्वगामी होते हैं।
- मोक्ष तक पहुँचने के लिए जीव को ज्ञान-धर्म और तप से सज्जित होकर अस्रवा (कर्म के प्रवाह) रोकना और निर्वाण-निरजरा के द्वारा कर्म से मुक्त होना होता है। जहाँ Śvetāmbara और Digambara के बीच tattva की गिनती में भिन्नता मिलती है, जीव का सत्य वही है कि वह चेतना-प्रधान आत्मा है और कर्म से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।