परोक्ष ज्ञान कितने भेद होते हैं
परोक्ष ज्ञान के मुख्य दो भेद होते हैं:
- शब्द-ज्ञାना (Śabda-jñāna): वेद-शास्त्र आदि मौखिक या लिखित प्रमाण से प्राप्त ज्ञान।
- अनुमान-ज्ञा (Anumāna-jñāna): तर्क-या अनुमान से प्राप्त ज्ञान।
इन दोनों को ही पऱोक्ष ज्ञान माना जाता है, जबकि Keval jñāna (अमरेंद्र ज्ञान) प्रत्यक्ष/अपरोक्ष भेद नहीं है और वही सर्वोच्च ज्ञान माना जाता है. अगर आप चाहें तो Digambara और Śvetāmbara के मतानुसार इन प्रकारों में कुछ छोटे- छोटे व्याख्यात्मक भेद भी दिखते हैं, पर सामान्यतः पऱोक्ष ज्ञान के ये दो प्रमुख भेद ही स्वीकारे जाते हैं.