क्षयोपशम के निमित्त से कौन सा ज्ञान होता है
क्षयोपशम के निमित्त (उपशमन के बाद) आत्मा को सम्यग्दर्शन प्राप्त होता है और इसके साथ दो प्रमुख ज्ञाने बनते हैं:
- मतिज्ञान (इंद्रियाँ-मन के द्वारा ग्रहण किया गया ज्ञान)
- श्रुतज्ञान (आकरणावरण कर्म के क्षय के बाद शास्त्रों से प्राप्त ज्ञान)
इस प्रकार क्षयोपशम होने पर पहले दर्शन मोह का उपशम होकर आत्मा सम्यग्दर्शन धारण करता है, और उसी समय उसके मति-ज्ञान और श्रुत-ज्ञान निकलकर वास्तविक सम्यक्त्व के साथ प्रकट होते हैं। (Digambar/Shwetambar के अनुसार मौलिक तत्त्व समान रहते हैं; भिन्न-भिन्न मार्गों में कुछ व्याख्यात्मक विवरण भिन्न हो सकते हैं, पर मूल विचार यही है कि क्षय-उपशम से मति ज्ञान और श्रुत ज्ञान उद्धट होते हैं।)
यदि आप चाहें, मैं इस विषय के शास्त्रीय मूल ग्रंथों के स्त्रोतों के वर्णन भी सरल शब्दों में दे सकता हूँ।