इंद्रिय व मन की sahita से कौन सा जाएं होता है
जैन धर्म में इंद्रियाँ (इन्द्रिय) और मन जब एक साथ रहते हैं, तब वे भावनाओं (कौमारी/कषाय) को जन्म देते हैं और इस कारण कर्म बंधते हैं। अर्थात् इन्द्रिय-संयोग से राग, द्वेष, मोह आदि कषाय उत्पन्न होते हैं जो जीव को कर्म के पिंजरे में बाँधते हैं और मोक्ष से दूरी बनाते हैं। इस कारण साधना में इन दोनों को संयत रखना अत्यावश्यक माना गया है ताकि निर्मल अहिंसा, तप, सत्य आदि चारित्रिक उपायों से कषाय कम हों और आत्मा को बन्धनों से छुटकारा मिले।
अगर आप Digambara और Śvetāmbara के बीच किसी विशिष्ट मतभेद के बारे में जानना चाहते हैं, तो मैं उसी अनुसार स्रोत-स्थापित अर्थ दे दूँगा.