इंद्रिय वामन की सहायता से कौन सा ज्ञान उत्पन्न होता है
इंद्रिय वामन (Indriya-vamana) का अर्थ है इंद्रियों पर नियंत्रण रखना या उनके प्रवाह को संयत करना। Jain धारणा के अनुसार जब व्यक्ति अपने पाँचों इंद्रियों (स्पर्श, रस, घ्राण, नेत्र/दृष्टि, श्रवण) आदि को संयमित कर संकीर्ण कर देता है, तब उसकी बुद्धि और चित्त स्पष्ट हो जाते हैं और अंततः Kevala Jnana (omniscience, अलौकिक ज्ञान) की स्थिति प्राप्त हो सकती है।
- तात्पर्य साफ है कि इंद्रिय-वामन से लक्ष्य Kevala Jnana है—अर्थात सभी संभव ज्ञान, perception, और अनुभव की पूर्ण स्थिति। इसे कई तत्त्वज्ञ पाठों में समान रूप से माना गया है कि इंद्रियों के संयम से आत्मा के शुद्ध ज्ञान की अवस्था संभव होती है। Digambar और Śvetāmbar दोनों traditions में इस तत्त्व के मूल उद्देश्य और परिणाम समान रहते हैं। ( jainknowledge.com)
संक्षेप में: इंद्रिय वामन की सहायता से उत्पन्न होने वाला ज्ञान है Kevala Jnana (omniscience)।