महावीर स्वामी खाना गाय
संक्षेप में:
- महावीर स्वामी ने अहिंसा (अहिंसा) को सबसे ऊपर माना और सभी जीवों के प्रति करुणा का संदेश दिया, इनमें गाय भी शामिल है। Jainism में हर जीव जिवा है और सुख-दुख का अनुभव करता है, इसलिए मार-पीट और हत्या से बचना परम महत्वपूर्ण है.
- भोजन के बारे में: महावीर के अनुयायियों ने हिंसा से बचते हुए शाकाहारी जीवन अपनाया। मार्का परंपरा के अनुसार मांस-त्याग किया गया और अंडी-स्त्री-मत्स्य आदि से भी दूरी रखने की चर्चा है। ऐहिक रूप से, अधिकांश जैन सिद्धांतों में शाकाहारी आहार ही प्राथमिक माना जाता है.
- गाय के बारे में धारणा: गाय एक पवित्र और दयालु जीव के रूप में सम्मानित मानी जाती है, पर जैन धर्म में गाय की पूजा देवी-देवता के तौर पर नहीं होती। गाय आदि अन्य सभी जीवों के समान संवेदना और अधिकार रखते हैं; हिंसा से बचना धर्म का मूल संदेश है.
- Digambar बनाम Shwetambar में भिन्नताएं: दोनों समूहों में अहिंसा और परहेज से जीवन संचय के सिद्धांत समान हैं, पर कुछ आचार-व्यवहार (जैसे उपवास, दिगंबर-श्वेतambar के कुछ नियम) में फर्क हो सकता है—पर गाय या मवेशी के प्रति सम्मान का मूल विचार समान रहता है.
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