भिक्षा महावीर स्वामी प्राणी
संक्षेप में:
- भिक्षा (bhiksha) Jain साधु-संतों का एक मुख्य आचार है। महावीर स्वामी ने अपने जीवन में रोज़ भोजन के लिए भिक्षा पर निर्भर रहने की साधना को अपनाया था ताकि अहिंसा, तप और वैराग्य दृढ़ रहे। भिक्षा का मतलब है layperson (श्रावक-श्राविक) से भोजन प्राप्त करना, ताकि संतुष्ट आत्मा को सांसारिक मोह से थोड़ा दूर रखा जा सके।
- महावीर स्वामी और प्राणी: जैन धर्म में सभी जीव (प्राणी) आत्मा हैं और उनके कष्ट-दुख से बचना अहम है। महावीर ने अहिंसा पर अधिक बल दिया, ताकि हर प्राणी की आत्मा को छोड़ा नहीं जाए और जीवन के हर रूप का सम्मान किया जाए।
- Digambar बनाम Shwetambar में भिक्षा का फर्क:
- मुख्य उद्देश्य: भिक्षा का उद्देश्य अहिंसा, संयम और आत्म-निर्भरता को बढ़ावा देना है; ताकि साधु अपने भीतर के जन्म-जन्मों के कर्म-बंधन से मुक्त होकर मोक्ष के मार्ग में अग्रसर हो सकें।
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