महावीर स्वामी खाना प्राणी
संक्षेप में जवाब: हाँ, महावीर स्वामी ने अहिंसा (non-violence) को अपनी सच्ची राह माना और उनके teaching के अनुसार जीवों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुँचाना गलत है। इसीलिए जैन धर्म में वेक्तियों, पशुओं, पौधों सबके प्रति करुणा का सिद्धांत है और खान-पान में भी अत्यंत संयम रहता है। अधिकतर जैन परंपराओं में महावीर ने मांस-खाने से परहेज ही किया, और शाकाहार को प्रमुख माना गया है। कुछ आहार-विवेक (जैसे मूल भाजियों, फलों आदि के बारे में sect-specific नियम) Digambar/ShwetambarTraditions में हल्के-फुल्के भिन्न हो सकते हैं, पर अहिंसा उनका मूल केंद्र है।
- महावीर ने अहिंसा को केंद्र में रखकर कहा: किसी जीव को चोट पहुँचाना, حتى शरीर, विचार या शब्दों से भी, धर्म का हिस्सा नहीं है। इसलिए उनके समय से लेकर आज तक जैन समुदाय में शाकाहार सामान्य है। ( jainknowledge.com, bbc.co.uk)
- महावीर स्वामी के बारे में संक्षिप्त जीवन-वृत्तांत और उनके प्रमुख व्रतों का सार भी यही दिशानिर्देश देता है (Ahimsa के साथ शास्त्रीय वचन, आदि). ( jainknowledge.com)
अगर आप चाहें, मैं महावीर-swami के अहिंसा और आहार से जुड़ी अधिक सरल बातों के छोटे-छोटे उपदेश भी बता सकता/सकती हूँ।