Gis kaal meai aadinath bhagwan ka mokch hua
नहीं. एडिनाथ ऋषभनाथ का मोक्ष इस समय के काल (आधुनिक वर्तमान समय) में नहीं हुआ था। पारंपरिक Jain धर्मशास्त्रों के अनुसार उन्होंने अपने संसारिक जीवन के पूर्ण होने के बाद बहुत पहले मोक्ष प्राप्त किया था—आमतौर पर हिमालय/कैलाश पर्वत के क्षेत्र में निर्वाण (मोक्ष) को प्राप्त माना जाता है। यह घटना वर्तमान मानव-संसार के समय से बहुत पहले की है।
- Digambar और Shwetambar दोनों परम्पराओं में एडिनाथ का मोक्ष माना जाता है, पर कुछ विवरणों में स्थान-स्थल और कथा-श्रृतियाँ अलग हो सकती हैं। पर मोक्ष की घटना एक पुराने काल की है, न कि इस काल में अभी का घटनाक्रम।
अगर चाहें, मैं इस विषय पर संक्षिप्त सार, मूल स्त्रोतों के ठीक अर्थ (arth) और दोनों परम्पराओं के बीच अलग-अलग विचार भी सरल शब्दों में समझा दूँ।