Hey prabhu ap tirth pravatiye aise kon bolta hai ?
संक्षेप में: Jain धर्म में “तीर्थ प्रवातिये” नामक एक स्थिर पद या पदवी के बारे में प्रमाणिक रूप से एक समान परंपरा नहीं है। अगर आप किसी खास पाठ, प्रार्थना, या द्रष्टा/वक्ता का हवाला दे रहे हैं, तो उसे समझने के लिए संदर्भ आवश्यक होंगे।
जो सामान्य रूप से तीर्थ-यात्रा (तीर्थाटन) या तीर्थस्थल पर प्रवचन/भजन करवाने वाले लोग होते हैं:
- सन्न्यासी/sadhvi या आचार्यों (धीरे-धीरे) — जो शिक्षण-प्रचार करते हैं
- गृहस्थ भक्त भी, जब वे किसी तीर्थ-प्रवचन कार्यक्रम या पाठ का संचालन करते हैं
- Digambar और Shwetambar दोनों शाखाओं में भिन्न-भिन्न परंपराओं के अनुसार भाषण-प्रवचन के तरीके और चयन में थोड़ा अंतर हो सकता है
अगर आप किसी विशिष्ट पाठ, स्तोत्र, या वाक्य का संदर्भ दे पाएँ, मैं उसी आधार पर सही अर्थ (arth) औरDigambar बनाम Shwetambar के अनुसार विभेद स्पष्ट कर दूँगा।