जैन धर्म के अनुसार पृथ्वी का आकार कैसा है, साथ में रेफरेंस भी देना
जैन धरम के अनुसार पृथ्वी/लोक (Madhya Loka) एक flat-disc जैसी संरचना है, न कि आधुनिक विज्ञान के Globe की तरह. इसके केंद्र में मेरु पर्वत (Mount Meru) रहता है और उसके चारों ओर Jambudvipa जैसी ठोस-continent-समूह के बेल-बाल concentric जल-समुद्र होते हैं. इस कल्पना में पृथ्वी एक समतल, गोल-सा डिस्क के रूप में प्रस्तुत होती है, जिसमें मानव-आबादी मुख्यतः Jambudvipa में रहती है. यह विवरण Tiloya Panatti, Samavayanga Sutra आदि जैसे جشنन-ग्रंथों में मिलता है और Lokakash के ज्यामितीय चित्रण में दिखाई देता है. Digambar और Shvetambar के बीच सूक्षम भिन्नताएँ हों, जैसे पृथ्वी के आयामों की गणना (राज्लोक/राज्जु इकाइयों से), पर मूल विचार—स्थिर, अजर-अनंत लोक और पृथ्वी का flat-disc स्वरूप—दोनों में समान माना गया है। ( jainknowledge.com, jainpedia.org)