जैन धर्म में शादी का रिवाज़ बताओ, रेफरेंस के साथ
जैन धर्म में शादी (vivaha) को एक घरेलू जीवन-यापन का धार्मिक-सामाजिक संस्कार माना गया है। यह आत्मा की मोक्ष-यात्रा से सीधे नहीं जुड़ा एक लौकिक (गृहस्थ) धर्म है, परंपरागत मूल्यों के साथ यह दम्पति के Dharma, अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य आदि के अभ्यास को समर्थन देता है। नीचे मुख्य बिंदु और स्रोत दिए जा रहे हैं।
- मूल विचार (arth): घरस्थ जीवन की नींव डालना, एक दूसरे की श्रद्धा-आदर, निष्ठा, और साथ में Dharma-श्रद्धा के साथ बच्चों की शिक्षा-पालन की जिम्मेदारी उठाना. विवाह ग्रीहस्थ जीवन का एक संस्कार है, जो दम्पति को साथ मिलकर नैतिक जीवन, अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य (विशेषकर जीवन साथी के प्रति वफादारी) और अपरिग्रह जैसी बुनियादी शिक्षा का पालन करने के लिए प्रेरित करता है. दोष-परित्याग, पारिवारिक सहयोग और धार्मिक अभ्यास में एक-दूसरे का सहयोग महत्त्वपूर्ण है. ( jainknowledge.com)
- दिगम्बर बनाम श्वेतांबर में आम स्पष्टताएँ (Differences): दिगम्बर-श्वेतांबर दोनों संप्रदायों में विवाह एक गुरु-शिष्य-संस्कार नहीं है, बल्कि grihastha जीवन के लिए एक पवित्र, सामाजिक-धार्मिक अनुशासन है। परंपरागत रीति-रिवाजों, रीतियों (कथन-पद्धति, समारोह के क्रम) औरgotra/जाती-आधारित चयन में फर्क आ सकता है; परंतु मूल उद्देश्य—दम्पति का Dharma-पोषण और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में साथ चलना—दोनों में समान माना जाता है। ( jainknowledge.com)
- व्यवहारिक क्रम (संक्षेप):
यदि आप चाहें, मैं इन संदर्भों से छोटे-छोटे पाठ/उपदेश भी दे दूँ, या विवाह-गृहस्थ धर्म (गृहस्थधर्म) के सूक्ष्म दिगंबर/श्वेतांबर स्वरूप के बारे में और स्पष्ट कर दूँ। नीचे Jain Knowledge के प्रासंगिक पन्नों के संकेत दिए जा रहे हैं (इनमें से आप चाहें तो लिंक देख सकते हैं; नीचे लिंक टेक्स्ट को ही लिखा गया है):
- विवाह in Jainism: एक संक्षिप्त, गृहस्थ-धर्म पर केंद्रित व्याख्या: You can read more here
- How do Jains propose marriage: You can read more here
- How should married jain couples treat each other?: You can read more here
नोट:
- अगर आप चाहें कि मैं कोई खास धर्मग्रंथ/सूत्र से मूल श्लोक/उद्धरण दे दूँ, तो बताइए—मैं Digambar/Shwetambar के अनुसार सही अर्थ के साथ दे दूँगा।