जैन धर्म के अनुसार पुत्री को कितना हिस्सा दिया जाना चाहिए
जैन धर्म में विरासत (पारिवारिक संपत्ति का हिस्सा) के बारे में स्पष्ट और एकसार नियम नहीं दिया गया है कि पुत्री को कितना हिस्सा मिलेगा। पौरुषों के लिए कोई एक निश्चित प्रतिशत निर्धारित नहीं है, और यह बातें विभिन्न परंपराओं (Digambar बनाम Shwetambar) में भिन्न बताई जाती हैं।
- Digambar और Shwetambar दोनों में पारंपरिक रिवाजों में पुत्र के हिस्से का जोर अधिक रहने की प्रवृत्ति पाई जाती रही है, लेकिन पुत्री के लिए भी कुछ हिस्सा रखा जाता है।
- आधुनिक व्यवहार में अधिकांश जैन समुदायों में पुत्री को भी समान अधिकार देकर विरासत में भाग देना मान्य है, और कई जगह सीधे-सीधे बराबर हिस्सेदारी की प्रवृत्ति है।
- वास्तविक भाग कितना होगा—कौन से नियम लागू होंगे—यह स्थानीय समुदाय, घर के पूर्व-निर्धारित नियम, और परंपरागत मान्यताओं पर निर्भर कर सकता है।
यदि आप किसी विशिष्ट जैन-संप्रदाय (Digambar/Shwetambar) या किसी विशेष ग्रंथ/समाज के नियम के बारे में पूछना चाहें, तो कृपया बताइए; मैं उसी अनुसार सटीक और पारंपरिक अर्थ के साथ जानकारी दूंगा।