45 aagams with description in hindi
यहाँ जैन धर्म के 45 आंगों (Anga) की संक्षिप्त सूची और हर एक का हिंदी में सरल वर्णन है। यह सूची श्वेताम्बर परंपरा के 45 आंगों के मानक क्रम के अनुरूप है; दिगंबर परंपरा में कुछ नामों में मामूली भिन्नता हो सकती है। नीचे हर आंग का एक छोटा अर्थ/विवेचन दिया गया है ताकि समझना आसान हो।
11 अंग आंग 1) आयारं ग (आचारंग) – संन्यासियों के आचार, आचार-चर्या और नैतिक आचरण का मूल मार्ग. 2) सुयगाड़न संत्र (सूत्रगाड़ंग/सूतघटना) – विशुद्ध ज्ञान, मतभेदों और दर्शन संबंधी विचारों की चर्चा. 3) ठाणंग – teaching के विभिन्न बिंदु और आचार की विभाजन रचना. 4) समवायंग (समवायांग) – संख्या-आधारित समूह और संयुक्त उपायों का पाठ. 5) व्याःया-प्रतंनी/भगवती (भगव्य) – व्याख्या-प्रज्ञप्ति, कथाओं और नियमों की व्याख्या. 6) ज्ञाता-धर्मकथां (ज्ञातधर्मकथांगा) – धार्मिक कहानियाँ और शिक्षाप्रद उपाख्यान. 7) उपाशकदशांग (उपासकदशांग) – भक्तगणों के आचरण और प्रमुख آموزش. 8) अणुत्तरोवावाय दशाँ (अणुत्तरोडशांग) – वे लोग जिन्हें इस जन्म में मोक्ष का मार्ग मिला हो, उनकी चर्या. 9) अनुत्तरोपपातिकदशाह (अनुतत्तरुपातिका-dashāḥ) – उच्चतम स्वर्ग में जन्म लेने वाले पुरुष/स्त्रियों की चर्चा. 10) पन्ह-वागरण (प्रश्न-व्याकरण) – प्रश्नों और उनके उत्तरों का संकलन। 11) विवाग-सुईया (विपाकश्रुत) – कर्मों के परिणामों के विवेचन।
12 अपंग अंग (Upanga) 12) uvāvāiya-sutta (उव्वावय-sutta) – जन्म-स्थान और पुनर्जन्म के स्थानों की चर्चा। 13) राय-पसेणिज्जा (राजा-प्रश्निया) – राजा के प्रश्नों और उत्तरों का संयोजन। 14) जीव-जीवाभिगम (जीव-जीवा-भिगम) – जीव और निर्जीव की श्रेणियों का वर्गीकरण। 15) पन्नावण (प Prajñapanā) – अहिं-ज्ञान-नीतियाँ, दर्शन और नैतिक विषयों पर घोषणा। 16) सूर्य-prajñapti (सूर्य-प्रज्ञप्ति) – सूर्य का महत्त्व और उससे जुड़ी शिक्षाएँ। 17) जंबुद्वीप-प्रज्ञप्ति (जम्बूद्वीप-प्रज्ञप्ति) – Jain संसार-आकाश-मानचित्र का विवरण. 18) चन्द्र-प्रज्ञप्ति (चंद्र-प्रज्ञप्ति) – चंद्रग्रहण और अन्य ब्रह्मांडीय चक्रों पर विवरण. 19) नरकावलिका/कप्पिय (निरयावली/कप्पिय) – नरकलोक की कथाएँ और नैतिक शिक्षा। 20) कप्पावदिसिया ( Kalpāvatāṃsikāḥ) – कल्प-आख्यानों की श्रृंखला। 21) पुफ़िया (पुष्पिया) – फूलों/यथार्थ कथाओं का समूह। 22) पुष्प-चुलिया (पुष्प-चुलिका) – নन्दिन/विद्या के उपाख्यान। 23) वंहि-दसाओ (वृषिणि-दशाह) – ऐतिहासिक राजवंशों और कथाओं का संकलन।
4 चेद-शास्त्र (Cheda-sutras) 24) आयार-दशाओ (आचारदशा) – मुनि/मणि के नैतिक आचार के दस अध्याय ( Kalpa-sutra प्रमुख रूप से 8वाँ अध्याय का प्रसिद्ध उल्लेख)। 25) बिहा कappa (ब्रहदकल्प) – धर्म-कायदा का बड़ा संहिता/धर्म-सम्मत निर्देश। 26) ववहारा (vyavahara) – व्यवहार-व्यवस्था, निर्णय-नीति। 27) नीशीठ (नीषिथ) – निषिद्ध आचार और आचरण-नियम। 28) जीया-कप्पा (जीत Kalpa) – परम्परागत नियमों का आचरण-समूह। 29) महा-नीशीह (महानिशीथा) – बड़े निषिद्ध नियम; कुछ संप्रदायों में मान्य।
2 मुल-शास्त्र (Mula-sutras) 30) दाशावैकालयिका-सutta (दशavajuालयिका) – नव mendicants के लिए स्मरणीय पाठ। 31) उत्तरधिकायणा-सutta (उत्तराध्ययन) – الفكر-नैतिकता और अरिहंत-सिद्धि की राह। 32) अवश्यका-सुutta (आवश्यक) – नियम और नैतिक आचरण की मूल बातें। 33) पिण्ड-निज्जुट्ती और ओघ-निज्जुट्ती – (कुल मिलाकर) मौलिक नियमों का संकलन; कुछ पाठकों द्वारा संकलित संहिताएँ। 34) नंडी-सूत्र (नंदी) – ज्ञान के प्रकारों पर चर्चा। 35) अण्यूयोग-द्वारा (अन्यूयोग-दार्व) – विश्लेषणात्मक तर्क, ऐनकांतवाद। 36) पंचकल्प (पंचकल्प) – मौलिक नियमों/आचार के दस भाग।
10 प्रसङ्क-प्रकरण (Paiṇṇaya-sutras) 37) आदि-प्रत्याख्यान (आुरा-प्रत्याख्यान) – रोगी/कष्ट के समय संन्यास का गूढ़ विचार। 38) भक्ता-परिज्ञा (भक्तिपरिज्ञा) – भक्ति और भोजन-त्याग के नियम। 39) तडुल्वइचारिक (तडुल्वैcharika) – चावल-आलू आदि पर विचार-नीति। 40) चन्द्रवेद्ध्यक (चन्द्रवज्जह) – शुद्ध ज्ञान के लिए ध्यान-प्रणाली। 41) देवेंद्रस्ताव (देवेन्द्र-स्ताव) – देवों के राजा का स्तवन। 42) गणि-विद्या (गणि-विज्ञा) – गण-शास्त्र और ज्ञान का प्रसार। 43) महाप्रत्याख्यान (महाप्रत्याख्यान) – महा-निर्माण और त्याग की महान निष्ठा। 44) वीर-थवा (वीर-स्तव) – वीर-गाथाओं का संकलन। 45) अन्य प्रकरण (चतुर्शरण/सृष्टि-स्तर आदि) – चार refuges, उत्पत्ति-धारणा आदि विषयक छोटे ग्रंथ।
संक्षिप्त टिप्पणी
- ऊपर दिए गए 45 आंगों में 11 आंगा-सूत्र और 34 अंग-बह्या आंग सम्मिलित हैं; दिगंबर-श्वेताम्बर के दृष्टिकोण में इन्हीं नामों/श्रेणियों का सामान्य मिलान माना जाता है, कुछ स्थानों पर नामों में भाषा-रूपांतरण या संख्याओं में मामूली भिन्नता हो सकती है।
- अगर आपको इनमें से किसी विशेष आंग का अधिक विस्तृत हिंदी वर्णन, उसका मूल संहिता पाठ (उद्धृत श्लाघा) या धारणा-मत (Digambar बनाम Shvetambar) अलग-अलग व्याख्या के साथ चाहिए, तो बताइए—मैं उसी के अनुसार विस्तृत, शुद्ध Jain धरोहर-परक विवरण दे दूँगा।
नोट
- अगर आप चाहें, मैं हर आंग के लिए एक-एक छोटा हिंदी सार (मुख्य शिक्षा) भी बना दूँ ताकि तेज़-सी समझ हो।
- किसी specific आंग के बारे में ज्यादा जानकारी चाहें तो बताएं।