45 aagams In hindi
हाँ. 45 आगम श्वेताम्बर परंपरा के महत्वपूर्ण ग्रंथ हैं और इन्हें हिंदी में नीचे नामों के साथ सार समझा सकता हूँ. Digambar और Shvetambar में कुछ मान्यताएँ भिन्न हैं, इसलिए अंत में छोटा सा स्पष्ट करण भी दे रहा हूँ.
30 मुख्य बिंदु (45 आगमों का संक्षिप्त सूची)
11 अंग आगम (मुख्य आगम)
- आचारांग सूत्र
- सूत्तरकृतांग सूत्र
- समावयांग सूत्र
- व्याख्या–prajnāpti (भगवती सूत्र)
- ज्ञाता-धर्मकठांग सूत्र
- उपासक-दशांग सूत्र
- अंतक्रुद्ध-दशांग सूत्र
- अनुत्तरौपासान दाशांग सूत्र
- प्रश्न–व्याकरण सूत्र
- विपाक सूत्र
12 उपांग आगम
- औपपातिका सूत्र
- राजा-प्रश्निया सूत्र
- जीवजिवाभिगम सूत्र
- पन्नवणा सूत्र
- सूर्यम pannatti (सूर्य पन्नत्ति)
- जम्बू द्वीप पन्नत्ति
- कанда पन्नत्ति
- नरकावलिया (नirayāvaliyāo)
- कल्पावतंसिका (Kalpāvataṃsikāḥ)
- पुष्पया (Pupphiāo)
- पुष्प-Cūliāo (Puppha-cūliāo)
- वंहि-दशao (Vaṇhi-dasāo)
6 चेदसूत्र (चेडा-सुत्र)
- आयार-दशाओ
- भीहा कappa (Bihā Kappa)
- वेवहरा (Vavahāra)
- निसि़हा (Nisīha)
- जिआ-कप्पा (Jīya-kappa)
- महा-निसि़हा (Mahā-nisīha)
4 मूलसुत्र
- दसवेयाळिया-सुत्र (Dasaveyāliya-sutta)
- उत्तरग्धयणा सुत्र (Uttarajjhayaṇa-sutta)
- अवस्सय सुत्र (Āvassaya-sutta)
- पिण्ड-निज्जुट्ति और ओघ-निज्जुट्ति (Piṇḍa-nijjutti, Ogha-nijjutti)
2 चूलिका सुत्र (चूलिका-सुत्र)
- नंदी-सुत्र (Nandi-sūtra)
- अनुउयोगद्वारा-sūtra (Anuyogadvāra-sūtra)
10 प्राकूरणक (Paiṇṇaya Sutras / प्राकीर्णक)
- चौसाराṇa (Cau-saraṇa)
- आूर-प्रत्याक्षणा (Āura-paccakkhāṇa)
- भट्ट Parrinnā (Bhatta-parinnā)
- संव्दारग (Saṃthāraga)
- तण्डुल-वेयालिया (Taṇḍula-veyāliya)
- सिंदा-वेज्झाया (Canda-vejjhaya)
- देविंदा-थया (Devinda-tthaya)
- गणि-विज्जा (Gaṇi-vijjā)
- महा-प्रCaps-हणा (Mahā-paccakkhāṇa)
- वीर-थवा (Vīra-tthava)
Digambara बनाम Svetambara पर फर्क (संक्षेप में)
- Svetambara परंपरा मानती है कि 45 आगमों के भीतर 11 अंग आगम और 34 अंग-बह्या आगम, आदि हैं; इनमें 12 उपांग, 6 चेडसुत्र, 4 मूलसुत्र, 10 प्राकीर्णक शामिल हैं. कई पाठ इस सूची को आज के समय में संरक्षित मानते हैं.
- Digambara परंपरा का मानना है कि मूल आगम पूर्णतः lost हो चुके हैं; वे अपने ढंग के संकलनों, टीकाओं और अन्य ग्रंथों को संदर्भित करते हैं, पर आज उपलब्ध 45 आगमों को ऑथेंटिक नहीं मानते. इस कारण सूची और पाठ में अंतर रहता है.
अगर आप चाहें, मैं इन आगमों के नामों की पूरी हिंदी–अनुवादी सूची (11 अंग, 12 उपांग, 6 चेदसुत्र, 4 मूलसुत्र, 2 चुलिका, 10 प्राकीर्नका) एक साफ-सुथरे क्रम में दे सकता हूँ.
आप चाहें तो नीचे दिए Jain Knowledge के पन्ने में इन आगमों की सूची पढ़ सकते हैं: You can read more here