प्रश्न 2 :- मोक्ष के दो भेद बताईये ?
मोक्ष के दो मुख्य प्रकार (भिन्न दृष्टिकोण नहीं, बल्कि दो पहलू) इस प्रकार समझे जाते हैं:
- भक्त मोक्ष (सिद्ध मोक्ष/Siddha): मोक्ष प्राप्त होने के बाद आत्मा सिद्ध(State) में स्थित रहती है—अर्थात निर्विकल्प, अविनाशी स्थिति में पहुँच जाती है। इस अवस्था में जीव सारे कर्मबंधनों से मुक्त होते हैं और सतत आनंद, ज्ञान, और शक्तियों के साथ सिद्धाशीलि (Siddhashila) में स्थिर रहती है।
- संभावित मोक्ष (Bhavya या निष्काम मोक्ष के लिए क्षमतावाला): वे जीव जिन्हें मोक्ष की संभाव्यता (भव्यता) है, वे ही मोक्ष प्राप्त करने की दिशा में प्रयास कर सकते हैं। अर्थात कुछ जीव ऐसे होते हैं जिनमें मोक्ष पाने की क्षमता (bhavyata) है, लेकिन उसे सचमुच प्राप्त कर लेने के लिए सही ज्ञान, दर्शन और आचरण आवश्यक रहते हैं। जो Abhavya हैं, वे इस जन्म में मोक्ष नहीं पाते।
नोट:
- Jain धर्मशास्त्रों में मोक्ष के लिए प्रमुख मार्ग है Ratnatraya (सत्य दर्शन, सही ज्ञान, सही आचरण) और साथ ही तप के अभ्यास को भी अहम माना गया है। मोक्ष तब पाया जाता है जब सभी karmas पूर्णतः नष्ट हो जाते हैं और आत्मा सिद्ध अवस्था को प्राप्त कर लेती है।
अगर आप चाहें, मैं इन बिंदुओं को और सरल शब्दों में और संक्षेप में भी समझा सकता हूँ या digambar/shiwetambar पर फिर भी स्पष्ट विभेद समझा दूँ।