प्रश्न 2 :- साधू कितने दोषो के टालकर आहार ग्रहण करते है ?
संक्षेप में:
- साधु आहार ग्रहण करते समय पाँच प्रकार के दोषों से बचते हैं (पाँच महाव्रतों के सिद्धान्त के अनुरूप): अहिंसा (हिंसा से बचना), अचौर्य (चोरी से बचना), ब्रह्मचर्य (संपत्ति-यौनाचार से बचना), सत्य (सत्य बोलना/झूठ से बचना), असंग्रह/परिग्रह (अनवश्यक संपत्ति-आवश्यकता से बचना) — इन दिवार्तों के अनुरूप आचार-आचरण अपनाते हैं।
- यह एक सामान्य नियम है; Digambar और Shwetambar परंपराओं में कुछ व्यवस्थागत भिन्नताएं हो सकती हैं, लेकिन मूल भाव यही रहता है: भोजन ग्रहण से पहले और बाद में पवित्र आचरण बनाए रखना।
- यदि आपको विशेष ग्रंथ/सूत्र के अनुसार विवरण चाहिए, बताइए ताकि मैं वही स्रोत से स्पष्ट Arth दे सकूं।