देवगती में कौन सा स्थान रहता है
संक्षेप में: देवगति से मतलब देवलोक से है, जहाँ देव रहते हैं। जैन धर्म के अनुसार संसार के तीन गती (गति) में देवगति ही सर्वोच्च और सुख-संपन्न मानी जाती है, जिसे मोक्ष की दिशा भी कहा जा सकता है जब तक कर्म के अनुसार वहाँ के सुख शेष रहते हैं। देवगति में कई अलग-अलग देवलोक होते हैं, जैसे इन्द्रलोक आदि, पर उन सभी का सामूहिक क्षेत्र देवलोक ही कहा जाता है।
ध्यान दें:
- जैन दार्शनिक साहित्य के अनुसार देवगति में स्थित स्थानों के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है, परन्तु यह सब कर्म-फल और अंतर्दृष्टि के अनुसार परिवर्तनशील हैं।
- Digambar और Shwetambar के बीच इस विषय पर मूल व्याख्या में कोई मौलिक भिन्नता नहीं मानी जाती; दोनों ही देवगति को मोक्ष की दिशा में एक ऊँचा और पवित्र मार्ग मानते हैं।