Dhyaan in hindi
ध्यान (Dhyan) जैन धर्म में चित्त को एकाग्र करके निर्विकल्प स्थिति पाने की साधना है। इसे सरल भाषा में कहें तो एक जगह मन को टिकाकर Dharma, Shuddha आत्मा की ओर देखने की कला है।
मुख्य बातें (संक्षेप में)
- मतलब: chitta ni nirodh (चित्त की चंचलता रोकना) और एक alamban (एक वस्तु/स्वरूप) पर मन को केंद्रित करना।
- चार प्रमुख प्रकार (परंपरा के अनुसार):
- अन्य प्रकार: पिण्डस्थ, पदस्थ, रूपस्थ, रूपातीत जैसे भीतर-बाहर दोनों दृष्टिकोण भी बताए जाते हैं; और शुक्लध्यान के अतिरिक्त कई专项 ध्याने भी बताए जाते हैं।
- अभ्यास कैसे करें (सरल मार्गदर्शन):
- परिणाम: चित्त शांत होता है, विकार कम होते हैं, आत्मा का दर्शनlier् साक्षात्कार (स्व-पर) और परमात्मा के रूप में अनुभव प्रबल होता है।
ध्यान को समझना और करना आसान हो सके, इसके लिए अपनी परंपरा में जो शब्द/विधियाँ बताई जाती हैं, उन्हें उसी शब्दावली में अपनाकर चलना सबसे उपयुक्त रहता है। अगर आप चाहें तो मैं इन्हीं प्रकारों में से एक के लिए कदमबद्ध अभ्यास अपने लिए बना दूँ।
(नोट: अगर आप Digambar या Shwetambar परंपरा के विशिष्ट आचार-विधि के अनुसार विवरण चाहते हैं, बताइए—we मैं उसी परंपरा के अनुसार स्पष्ट कर दूँगा।)