प्रमाण किस नाम से जाना जाता है अकॉर्डिंग टू दिगंबर
Digambar परम्परा में प्रमाण (pramana) को खास तौर पर “श्रुति” के रूप में माना जाता है। इसका मतलब है कि वे महावीर के उपदेशों और उनके शिष्याओं द्वारा संरक्षित digambara ग्रंथों को प्रमाण के रूप में मानते हैं। प्रमुख Digambara ग्रंथों में सत्खण्डागम (Satkhaṇḍāgama) और कसयاپहुदा (Kāsāyapahudā) जैसे प्रमाणस्वरूप मूल ग्रंथ शामिल हैं। इसके अलावा वे सामान्य प्रमाणों के रूप में प्रत्याक्ष (प्रत्यक्ष ज्ञान) औरanumāna (अनुमान) को भी मानते हैं, पर श्रुति (श्रुति/श्रुत-pramāṇa) ही परम्परागत और प्रमुख प्रमाण माना जाता है। इस विषय में Śvetāmbara के अनुसार अलग धारणाएं हो सकती हैं, जहाँ वे अन्य ग्रंथों को प्रमाण के रूप में देखते हैं, लेकिन Digambar में प्रमाण का स्तम्भ मुख्य रूप से श्रुति ही रहता है।