तिविहार पचकान का हिंदी में अर्थ
तिविहार पचकाण (तिविहार पचकान) जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण प्रतिज्ञा (व्रत) है, जिसे मुख्यतः श्रावक (गृहस्थ) उपवास या प्रतिक्रमण के समय लेते हैं। इसका उद्देश्य संयम, आत्मशुद्धि और अहिंसा का पालन करना है। 'तिविहार' का अर्थ है 'तीन प्रकार के विहार' और 'पचकाण' का अर्थ है 'पाँच प्रतिज्ञाएँ'।
तिविहार पचकाण के पाँच प्रतिज्ञाएँ (संकल्प):
- स्थितिविहार (Sthitivihaar) — एक ही स्थान पर रहना; उपवास के दौरान कहीं और न जाना।
- शय्याविहार (Shayyavihaar) — एक ही शय्या (बिस्तर) का प्रयोग करना।
- भोजनविहार (Bhojanvihaar) — एक ही स्थान पर भोजन करना, भोजन के लिए कहीं और न जाना, और सीमित भोजन करना।
- प्रत्याख्यानविहार (Pratyakhyanvihaar) — उपवास या संकल्प के दौरान किसी भी प्रकार के दोषयुक्त या निषिद्ध पदार्थ का त्याग करना।
- मूलगुणविहार (Moolgunvihaar) — मूलगुणों (जैसे अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह) का पालन करना।
संक्षेप में: तिविहार पचकाण का हिंदी में अर्थ है — उपवास या प्रतिक्रमण के समय पाँच प्रकार के संयम और नियमों का पालन करने की प्रतिज्ञा लेना, जिससे आत्मशुद्धि और अहिंसा का पालन हो सके।