निगोद के कारण
निगोद के बारे में सरल जवाब:
- निगोद क्या है: निगोद जैन धर्म के अनुसार सबसे निम्न生命-स्तर के जीव होते हैं। ये अणुवृंन्त (बहुत छोटे) कोशिकाओं जैसे असंवेदी जीव होते हैं, जिनके पास कोई ज्ञानेन्द्रियाँ नहीं होतीं और वे एक ही जगह कई लाख-करोड़ों होते हैं। इनसे निकलने वाले जीवन-कणों की संख्या अत्यंत बड़ी मानी जाती है।
- निगोद के कारण (क्यों ये जन्म लेते हैं):
- सुंदर संकेत: निगोद आत्मा को मोक्ष नहीं मिलती; यह बंधन के क्रम में एक निम्न स्तर का जन्म है। मोक्ष तब संभव है जब आत्मा अपने कर्मों के बांधनों को धीरे-धीरे解除 करके ऊँचे भवों में पहुँचे—परमित शोधन और सही दर्शन/गुरु-ग्रहण से।
- धारणाओं में अंतर (Digambar बनाम Shwetambar): दोनों परंपराओं में निगोद का विचार समान रहता है—सबसे न्यूनतम, अनेक जीवों का समूह। दोनों में यह भी माना जाता है कि कर्म के कारण ही यह जन्म-संभाव बनते हैं; छोटे-से छोटे जीव भी कर्म-संवेदना के क्रम में निगोद-योनियाँ पा लेते हैं। कुछ प्रवचनों में विवरणों में शब्द-संयोजन या उपमानों में भिन्नता हो सकती है, पर मौलिक अर्थ वही रहता है।
यदि आप चाहें, मैं निगोद के बारे में प्रमुख शास्त्रों से सारगर्भित स्पष्ट अर्थ (Arth) और उद्धरण दे सकता हूँ—बस बताइए।