Tatva Sutra mein dusre adhyay mein kis tatv ka varnan hai
द्वितीय अध्याय Tatva Sutra (Tattvartha Sutra) का है, जिसे “Category of the Living” कहा जाता है। इसका मुख्य tattva जीव-तत्त्व (jīva-tattva) का वर्णन है। यानी इस अध्याय में जीवों की प्रकृति, उनके गुण-धर्म, और उनके विवेक-सम्बन्धी विभिन्न वर्गों के बारे में बताया गया है — जैसे जीव की पहचान, चित्त-गुण (bhāva), ज्ञान-चेतना, विभिन्न प्रकार के जीव और उनकी स्थिति आदि।
संक्षेप में: दूसरे अध्याय में जीव तत्त्व (jīva) के बारे में स्पष्ट वर्णन किया गया है, जबकि अन्य अध्याय अजív (अजीव) आदि tattva को संबोधित करते हैं। Digambar और Shwetambar दोनों परंपराओं में यह जीव-तत्त्व का मूल और समान माना गया है, हालांकि प्रस्तुति और विवरणों में कभी-कभी शास्त्रीय व्याख्यों में सूक्ष्म भिन्नताएँ मिलती हैं।
अगर आप चाहें, मैं इस अध्याय के विशेष श्लोकों या शब्दार्थ (arth) को Digambar‑Shwetambar व्याख्या के अनुरूप सरल भाषा में भी समझा सकता हूँ।