Shammi Sharif pratighat rahit Hain Sahi galat
प्रत्युत्तर: सही।
Jain धर्म में अहिंसा सबसे आदर्श नैतिक गुण है. प्रतिहत/प्रतिकारण (यानी बदला लेने या दुष्ट व्यक्ति पर हिंसा करना) को आमतौर पर निषेध माना गया है. क्षमावान, शांत, और क्षमा करने वाले व्यक्तित्व को उच्च माना गया है, क्योंकि वह कर्मों को बढ़ने से रोकता है और आत्मा की शुद्धि की दिशा में मदद करता है.
कुछ खास स्थितियों में भी Jain मौलिक विचार यह है कि क्रूरता से बचना चाहिए और हिंसा से परहेज करना चाहिए, भले ही दबाव या गलत व्यवहार के जवाब में. लेकिन जरूरत पड़ने पर रक्षा के मामले भी non-violent तरीके से सोचने और संतुलित निर्णय लेने को प्रेरित करते हैं, ताकि दोषपूर्ण कर्म न बने.
यदि आप किसी विशिष्ट श्लोक, तत्त्व, या संप्रदाय (Digambar/Shwetambar) के अनुसार व्याख्या चाहते हैं, तो बताएं—मैं उसी अनुसार अधिक स्पष्ट arbha और संदर्भ दे दूँगा.