शुद्ध ध्यान को क्या कहते है
शुद्ध ध्यान को ज्योतिर्वत शब्दों में Sukla Dhyan (शुक्ल ध्याण) कहा जाता है। यह चार प्रकार के ध्यान-ध्यानों में से एक है और इसे “शुद्ध/पवित्र ध्यान” भी माना जाता है। शुक्ल ध्याना वह अवस्था है जिसमें मन पूर्ण शुद्धता, विमल विचार और कामनाओं-राग-द्वेष से मुक्त होकर आत्मा की वास्तविक प्रकृति पर स्थिर होता है; इससेtym ज्ञान और मोक्ष की दिशा खुलती है। (अन्य तीन ध्यानों के साथ मिलकर Jain ध्याना-सूत्र में इसकी जगह बताई गई है: आर्त ध्याना, रौद्र ध्याना, धर्म ध्याना, जिनमें शुक्ल ध्याना शुद्ध और पूजनीय माना जाता है।) कुछ ग्रंथों में यह कहा गया है कि शुक्ल ध्याना अत्यंत उन्नत आत्माओं के लिए है, और अंततः kevala-jnan व मोक्ष को पहुंचाता है।
ध्यान के बारे में दो प्रमुख परंपराओं में छोटे-छोटे विवरण भिन्न हो सकते हैं, लेकिन शुक्ल ध्याना की मूल विचारधारा दोनों Digambar और Shwetambar परंपराओं में समान रूप से मान्य मानी जाती है।