शुद्ध ध्यान को क्या कहते है , उत्तर स से होना चाहिए श से नहीं
साफ़ शब्दों में कहें तो शुद्ध ध्यान Jain परम्परा में सबसे स्पष्ट रूप से “शुद्ध समाधि” कहा जा सकता है। दोनों शब्द एक दूसरे के पर्याय मान लिए जाते हैं, और ध्यान के शुद्ध अवस्था को दर्शाते हैं।
- अर्थ (arth): शुद्ध ध्यान वह अवस्था है जिसमें मन, वाणी, शरीर सभी एकदम शांत, स्निग्ध और धारणा-समर्पित हो जाते हैं ताकि जीव आत्मा के वास्तविक चारित्र्य और मोक्षमार्ग की ओर स्पष्ट दृष्टि बने।
- दृष्टिकोण:
- सरल शब्दों में: शुद्ध ध्यान वह अवस्था है जब आत्मा अपने असली स्वरूप को डगमगाए बिना अनुभव कर सके और संसार के सांसारिक विकारों से सेतु टूटे।
अगर आप चाहें, मैं इसे दर्शनशास्त्र के संदर्भ में Digambar और Śvetāmbara के छोटे-छोटे उद्धरणों के साथ भी सरल भाषा में विस्तार से समझा दूँ।