BhagwanMahavir vidhyaadhiyan ke liye gye tab konse vyakaran Granth ki rachna hui
46
संक्षेप में उत्तर: महावीर जी के समय किसी व्याकरण Granth की रचना नहीं मानी जाती है। वे विद्या-आध्ययन के समय व्याकरण ग्रंथ के लेखक नहीं थे। व्याकरण के मौजूदा प्रमुख Jain ग्रंथ बहुत बाद के काल में लिखे गए हैं।
- बाद के प्रमुख व्याकरणग्रंथों में से एक है Jainendra-vyakaraṇa (जीनेन्द्र-व्याकरण) – यह पंडित पुष्यपद (Acharya Pujyapada) के अंतर्गत समाहित माना जाता है।
- एक और महत्वपूर्ण ग्रंथ है Sakatayana-vyakakarana (Sakatayana का व्याकरण)।
- इसके अलावा संस्कृत-प्राकृत व्याकरण में Hemachandra द्वारा रचित Siddha-Hema-Śabdanuśāśana (शब्दनुषासन) बहुत प्रसिद्ध है; यह 12वीं सदी के बाद से middle-ages के श्रेष्ठ व्याकरण ग्रंथों में माना जाता है।
इन व्याकरण ग्रंथों की रचना Mahavir के समय नहीं, बल्कि उनके बाद के काल में हुई। जहाँ Digambar और Śvetāmbara परंपराओं में थोड़ा-बहुत भिन्नता मिलती है, वहीं इन ग्रंथों ने भाषाओं-व्याकरण को Jain समाज के शास्त्रीय अध्ययन के स्तर पर मजबूत किया।
आप चाहें तो मैं इन विषयों के लिए JainKnowledge की सम्बद्ध पन्ने दिखा दूँ: