Navkar tap ki vidhi aur kaise kiya jata hai in hindi
नवकार तप की विधि (Navkar Tap ki Vidhi):
नवकार तप जैन धर्म में एक महत्वपूर्ण तपस्या है। इसमें नवकार मंत्र का जाप और उपवास या अल्पाहार किया जाता है। यह तप मुख्यतः क्षमावाणी पर्व, पर्वाधिराज पर्युषण, या अन्य शुभ अवसरों पर किया जाता है।
नवकार तप की विधि:
- संकल्प लें:
प्रातःकाल स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। शांत चित्त होकर भगवान के समक्ष नवकार तप का संकल्प लें कि आप आज नवकार तप करेंगे।
- नवकार मंत्र का जाप:
नवकार मंत्र का 20, 50, 108, या 121 बार जाप करें (संख्या अपनी क्षमता अनुसार रख सकते हैं)। जाप करते समय मन को एकाग्र रखें।
- उपवास या अल्पाहार:
नवकार तप में प्रायः उपवास (एक समय या पूर्ण उपवास) किया जाता है। यदि स्वास्थ्यवश संभव न हो तो एक बार अल्पाहार (सात्विक भोजन, बिना हरी सब्जी, बिना फल, बिना मसाले आदि) किया जा सकता है।
- सामायिक या ध्यान:
संभव हो तो नवकार मंत्र के जाप के बाद कुछ समय सामायिक (30 मिनट) या ध्यान करें।
- पुनः नवकार जाप:
तप के दौरान जब भी समय मिले, नवकार मंत्र का स्मरण या जाप करें।
- पुण्य का आराधना:
संध्या के समय पुनः भगवान के समक्ष नवकार मंत्र का जाप करें और इस तप का पुण्य सभी जीवों को समर्पित करें (परसपर उपकार करें)।
विशेष ध्यान दें:
- इस दौरान पवित्रता, सत्य, अहिंसा का पालन करें।
- तप की समाप्ति पर क्षमायाचना (मिच्छामि दुक्कडम्) अवश्य करें।
नवकार तप का लाभ:
- आत्मशुद्धि होती है।
- मन शांत रहता है।
- पुण्य की प्राप्ति होती है।
- जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
नवकार मंत्र: णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं एसो पंच नमोक्कारो, सव्वपावप्पणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पडमं हवई मंगलं।
इस प्रकार नवकार तप विधिपूर्वक किया जाता है।