Hari bhadra purohit kaya sadviji bhagwat dwara dharma pamya
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यह लगता है कि आप जैन धर्म से जुड़े किसी स्तोत्र या पाठ के भाग का उल्लेख कर रहे हैं, लेकिन यह क्रम मुझे किसी ज्ञात जैन ग्रंथ में तत्काल नहीं दिख रहा। सही artha (अर्थ) और संदर्भ देने के लिए कृपया स्रोत या पूरा पाठ/सूत्र बताएं—जैसे वह कौन-सी ग्रंथीय सूची, दिगंबर-श्वेतांबर परंपरा, या कौन-सी रचना से लिया गया है।
अगर आप स्पष्ट कर दें कि यह किस स्तोत्र, गुरु-चरित्र, या श्लोक का भाग है, तो मैं उसी के अनुसार:
- मूल पाठ (यदि संभव हो) प्रदान कर दूँ,
- उसका सही andil (arth) बताऊँ,
- और दिगंबर/श्वेतांबर के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ हो तो उसे स्पष्ट कर दूँ।
ध्यान दें: मैं केवल जैन धर्म के authentic स्रोतों के आधार पर ही व्याख्या प्रस्तुत करूँगा और आपकी पूछ के अनुरोध के अनुसार साफ-साफ पारंपरिक अर्थ रखूँगा।