24 तीर्थंकर एकासन विधि (Ekāsana Vidhi)
- अर्थ (अर्थ): एकासन का अर्थ है एक बार भोजन करना, एक ही बैठक में संयम से भोजन करना, और यह भगवान or 24 तीर्थंकरों की प्रतिष्ठा के लिए किया जाता है। इसमें नावकार मंत्र और 24 तीर्थंकरों के नाम को याद किया जाता है। यह श्रद्धा-भक्ति और तपस्या का भाग है, परंपरागत रूप से श्वेताम्बर/ Digambar दोनों पर कुछ भाषिक विविधताएं हो सकती हैं।
1) तैयारी: स्नान, प्राकट (यदि संभव हो), जगह पवित्र करें; सरल, अहिंसक और सात्विक भोजन बनाएं या ग्रहण करें।
2) Sankalp (मन से निभाने की प्रतिज्ञा): “आज का एकासन श्री _______ तीर्थंकर के नाम पर कर रहा/रही हूँ।”
3) नेवकर मन्त्र (Navkar-Mantra) पाठ करें:
नमो अरिहंताणं, नमो सिद्धाणं, नमो आयरियाणं, नमो उवज्झायाणं, नमो लोए सव्वसाहूणं
एसो पंच णमो्कारो, सव्वपावप्पणासणो, मंगलाणं च सव्वेसिं, पडमं हवई मंगलं।
4) 24 तीर्थंकरों के नाम (क्रमवार) जाप करें। नीचे दिये 24 तीर्थंकरों के नाम परिचय के अनुसार जैन परंपरा में पंक्तिबद्ध सूची के रूप में गिना जा सकता है; प्रचलित क्रम में कुछ भेद हो सकता है:
ऋषभदेव, अजितनाथ, संभवनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ, पद्मप्रभु, सुपार्श्वनाथ, चंद्रप्रभु, पुष्पदंत, शीतलनाथ, श्रेयांसनाथ, वासुपूज्य, विमलनाथ, अनंतनाथ, धर्मनाथ, शांतिनाथ, कुंथुनाथ, अरंथ, मल्लिनाथ, मुनिसुव्रतनाथ, नमिनाथ, नेमिनाथ, पार्श्वनाथ, महावीर।
5) भक्ति/आरती या स्तुति (वैकल्पिक): “24 तीर्थंकर की जय,” या कोई छोटा स्तोत्र/चौबीसी आदि।
6) भोजन के लिए संकल्प/भावना: कल्याण के लिए शुद्ध, संयमी एवं अहिंसक भोजन लिए जाने का संकल्प रखें; एकासन के बाद अगला भोजन सूर्योदय-पूर्व तक नहीं किया जाता है (या परंपरा के अनुसार निर्धारित समय तक)।
7) प्रत्यक्ष उद्देश्य: एकासन के दौरान मन, वचन, कर्म में संयम बनाए रखना; भोजन के समय मौन/ध्यान का अभ्यास करना।
- भिन्न-भिन्न परंपराओं के संकेत:
- Digiambar बनाम Shwetambar के बीच भाषा-क्रम या पाठ में हल्का अंतर हो सकता है, पर उद्देश्य वही रहता है: Navkar मंत्र के साथ 24 तीर्थंकरों का स्मरण और एकासन से तपस्या।
- यदि कोई विशेष स्थानीय पाठ या परिवारिक व्रत-प्रथा हो, उसका पालन करें।
- संदर्भ/अतिरिक्त मार्गदर्शन (आप चाहें तो पढ़ सकते हैं):
- 24 भगवन इकाशना_navkarwali के बारे में विस्तृत ढांचे के साथ व्यावहारिक पाठ यहां पढ़ा जा सकता है.
- भगवन न एकासन (Bhagwan na ekasana) पर विचारशील विधि—तप, संकल्प आदि का सार नीचे दिया गया है.
यदि आप चाहें, मैं उसी क्रम को आपके खास संप्रदाय (श्वेताम्बर/Digambar) के अनुरूप थोड़ा और सादा या अधिक विस्तृत शब्दों में आप के लिए स्पष्ट कर दूँ।