Are there liberated souls from previous life cycles
हाँ. जैन धर्म के अनुसार पिछले जीवन चक्रों से मोक्ष पाने वाले प्राण (जिव) भी होते हैं। जिन्हें सिद्ध माना जाता है, वे सिद्धलोक में रहते हैं और मुक्त सर्वोच्च ज्ञान (केवलज्ञान) को प्राप्त होते हैं।
- मोक्ष पाने वाले जीव को मोक्ष प्राप्ति के बाद फिर घूम-फिर नहीं करना पड़ता; वे अब जीव नहीं रहते, पर परमात्मा स्वरुप मौजूद रहते हैं—यानी Siddha-loka में रहते हैं।
- उदाहरण के तौर पर इस चक्र के 24 तीर्थंकरों के अलावा अनगिनत सिद्ध हैं जो पहले-पूर्व जीवनों में मोक्ष पा चुके थे और आज भी सिद्धलोक में स्थित हैं।
- महावीर व अन्य तीर्थंकर इस चक्र के मुक्त जीवों में गिने जाते हैं; उनके अलावा भी अनेकों सिद्ध हैं जो पहले–पहले जीवनों में moksha प्राप्त कर चुके थे।
ध्यान दें:
- दोनों बड़े जैन संप्रदायों (दिगंबर और श्वेताम्बर) में मोक्ष और सिद्धलोक की बुनियादी समझ मिलता-जुलता है, लेकिन कुछ विवरणों में उनकी व्याख्याओं में सूक्ष्म भिन्नताएं हो सकती हैं।
यदि आप चाहें, मैं सिद्धलोक, केवलज्ञान, और तीर्थंकरों के बारे में अधिक स्पष्ट विवरण दे सकता हूँ।