Okay can you give me the best shloka from this barah Bhavna
बारह भावना में सबसे प्रसिद्ध और सारगर्भित श्लोकों में से एक है:
ध्रुव स्वभाव सुखरूप है, उसको ध्याऊँ आज दुखमय राग विनष्ट हो, पाऊँ सिद्ध समाज।
Meaning (arth):
- आत्मा का ध्रुव (स्थिर, अचल) स्वभाव ही सुखरूप है; उसी को आज ही ध्याने से याद करूँ।
- इस ध्यान से राग-द्वेष आदि दुःखदायक भाव नष्ट हों, और मैं सिद्ध (मोक्ष-संपन्न) समाज को प्राप्त करूँ।
नोट:
- बारह भावना के पाठ में शब्दों की एक-दूसरी संस्करणों में हल्के-फुल्के बदलाव Digambar और Shwetambar परंपराओं के अनुसार मिलते हैं, पर हर पाठ का मूल उद्देश्य detachmented living, अहिंसा, और आत्मा की सच्ची पहचान को टिके रखना है।