जैन धर्म के अनुसार पाप को नष्ट कर पुण्य की वृद्धि करे वो क्या है उत्तर म अक्षर से शुरू होता है
धर्म से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की वृद्धि होती है।
- Jain Dharma में जो वह कर्म या मार्ग है जो पापों को घटाकर पुण्य का संचय कराता है, उसे सरल शब्दों में कहा जा सकता है: धर्म (Dharm). धर्म के अंतर्गत सत्कर्मों का आचरण, संयम, तप, दान, स्वाध्याय आदि आते हैं—इनसे आत्मा के बन्धन कम होते हैं और पुण्य बढ़ता है।
- Digambar और Shwetambar दोनों ही परंपराओं में यह विचार समान रूप से माना गया है: धर्म का पालन ही पापों को घटाने और पुण्य के संचय का मूल उपाय है।