ganganadi ka neer nirmal ye line konsi pooja ki hai
यह लाइन गंगनदी का नीर निर्मल बताने والی व्याकरणिक पंक्ति Snatra Puja (स्नात्र पूजा) के प्रायः भावपूर्ण अभिषेक और Kalash भरने के क्रम में आती है। कई पाठों में इसे गंगा-जल (गंगाजल) तथा अन्य पवित्र जलों के मिलाकर पवित्र जल भरने के अयोध्या-उपाय के भाग के रूप में दर्शाया गया है। इसलिए इसे Snatra Puja का हिस्सा माना जाता है, जो जैन मुनियों की जन्म-आभिषेक (janma kalyanak) और तिथंरकरा के अभिषेक-उच्चारणों से जुड़ा एक प्रमुख अंश है. Digambar और Shwetambar परंपराओं में कुछ शब्दावली में भिन्नता हो सकती है, पर मूल अर्थ और स्नात्र पूजा का उद्देश्य वही रहता है—पवित्र जल से अभिषेक कर आचरण और भक्तिको शुद्ध करना।