Jain dharam me vastu sastra ko maana jata h kya
संक्षेप में: वैदिक या जैन पुराणिक साहित्य में वास्तुशास्त्र ( vastu shastra ) को जैन धर्म की प्राथमिक शिक्षाओं का हिस्सा नहीं माना जाता। जैन धर्म का मुख्य लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति और अहिंसा-परमात्मा के पालन पर केंद्रित है, जबकि वास्तुशास्त्र एक वास्तुकला/प्राकृतिक और दिशानिर्देशों का विज्ञान है।
- जैन śruti/आगमों में वास्तुशास्त्र के रूप में किसी औपचारिक द्वार-निर्देशन की मान्यता नहीं मिलती।
- कुछ स्थलों पर मंदिर-वास्तु या वास्तुकला के सामान्य सिद्धांत (जैसे प्रांगण, तीर्थ-स्थल का स्थान, आदि) पर ठोस विचार होते हैं, लेकिन इसे “जैन धर्म का वैदिक वास्तुशास्त्र” नहीं कहा जाता।
- दिगंबर औरשיवेदन (Digambar/Śvetāmara) परंपराओं में वास्तुशास्त्र के बारे में भिन्नता हो सकती है, पर अधिकांश प्रमुख Jain शिक्षाओं में यह विषय मौलिक धर्मग्रंथों में नहीं आता।
यदि आप चाहें, मैं इन बिंदुओं के बारे में अधिक सरल विवरण दे सकता हूँ या Jain temple architecture से संबंधित जैन-ग्रंथों में बताई गई दिशा-निर्देशों के संदर्भ समझा सकता हूँ।