Is Ravan will be Jain Tirthankar in future Chovisi?
संक्षेप में उत्तर: परम्परागत जैन ग्रंथों में रावण को भविष्य के 24 तीर्थंकर में से एक के रूप में नहीं माना गया है; वे अक्सर “प्रतिवासुदेव” (विरोधी-हीरो)
के रूप में वर्णित होते हैं। कुछ आधुनिक चर्चा या स्थानीय मान्यताओं में रावण को भावी तीर्थंकर के रूप में रखने की बातें मिलती हैं, पर यह सभी जैन संघों में स्वीकृत नहीं है और मुख्यधाराओं में समानमत नहीं है। कुल मिलाकरDigambar-श्वेताम्बर दोनों परंपराओं में इसका स्पष्ट या सार्वभौमिक मत नहीं है; कई स्रोत इसे एक विशेष कथा-परिप्रेक्ष्य में देखते हैं, न कि एक स्थापित सिद्धांत के रूप में।
जो स्पष्ट है वह यह है कि मौजूदा कालखंड में रावण को तीर्थंकर बनने की औपचारिक स्वीकृति नहीं मानी जाती, और जैन शिक्षाओं के अनुसार हर soul (जीव) के पास purification के माध्यम से भविष्य में मोक्ष-पालन की potential होती है, पर वह specific तीर्थंकर के रूप में कब और कैसे आएंगे, यह मुख्य पाठों में निर्धारित नहीं है।